पैसे रोकना भी हिंसा है
कमाई छीनना या खर्चा रोकना कानून में हिंसा है।
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कानून क्या कहता है
- PWDVA 2005 की धारा 3 कहती है: घरेलू हिंसा सिर्फ़ मार-पीट नहीं होती।
- घर-ख़र्च, दवाई या बच्चों की पढ़ाई के पैसे रोकना, आपकी चीज़ें या स्त्रीधन बेच देना, कमाई छीन लेना, काम करने से रोकना, यह सब आर्थिक हिंसा है।
- इसी क़ानून से मिल सकता है: प्रोटेक्शन ऑर्डर (धारा 18), घर में रहने का ऑर्डर (धारा 19), ख़र्चे और गुज़ारे का ऑर्डर (धारा 20), मुआवज़ा (धारा 22)।
- धारा 12 की अर्ज़ी मुफ़्त है, प्रोटेक्शन ऑफ़िसर के ज़रिए हो सकती है, और शुरू करने के लिए वकील ज़रूरी नहीं। मजिस्ट्रेट को 60 दिन में निपटाने की कोशिश करनी होती है।
- आपकी कमाई सिर्फ़ आपकी है। बराबर काम का बराबर दाम अब क़ानून है (Code on Wages, 2019)।
असली ज़िंदगी में
- «वह मेरी पूरी सैलरी ले लेता है», कमाई ले लेना पति का हक़ नहीं। क़ानून इसे घरेलू हिंसा कहता है। यह सही नहीं है।
- खाने, दवाई या बच्चों की स्कूल ज़रूरतों के पैसे सज़ा के तौर पर रोकना। यह सही नहीं है।
- नौकरी करने से रोकना, या चल रही नौकरी छुड़वा देना। यह सही नहीं है।
- ATM कार्ड, पासबुक या बैंकिंग वाला फ़ोन ज़ब्त कर लेना; आपका खाता «आपके लिए» ख़ुद चलाना। यह सही नहीं है।
- घर का सामान या आपकी चीज़ें बिना पूछे बेच देना। यह सही नहीं है।
- जिस पैसे पर आप निर्भर हैं, उसकी जानकारी से जान-बूझ कर दूर रखना। यह सही नहीं है।
- आपके नाम पर आई सरकारी योजना की रक़म कोई और ले ले। यह सही नहीं है।
सँभाल कर रखें
- चुपचाप तारीख़ वाला नोट रखें, कब, क्या, कितना। प्राइवेट नोटबुक या अपने ईमेल ड्राफ़्ट में।
- सैलरी स्लिप और मैसेज संभालें।
- सैलरी और सरकारी पैसा ऐसे खाते में जाए जो सिर्फ़ आप चलाती हैं। PIN और OTP परिवार में भी सीक्रेट।
- घर के बाहर किसी भरोसे वाले के पास ज़रूरत के वक़्त के लिए थोड़ा पैसा अलग रखें।
- एक भरोसे वाले इंसान को उसी वक़्त बता दें, वह गवाह बन जाता है।
- प्रोटेक्शन ऑफ़िसर को शिकायत मुफ़्त है, और इसके लिए शादी तोड़ना ज़रूरी नहीं।
एक कदम आज
आज से एक छोटी डायरी रखें, कब, क्या, कितना।
कहाँ जाएँ
प्रोटेक्शन ऑफ़िसर (हर ज़िले में) · वन स्टॉप सेंटर (सखी) · DLSA
किससे मिलें: प्रोटेक्शन ऑफ़िसर; OSC केस वर्कर