स्त्रीधन, आपके गहने आपके हैं

शादी में मिले गहने और तोहफ़े हमेशा आपके हैं।

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कानून क्या कहता है

  • शादी के वक़्त या आस-पास मिले गहने, तोहफ़े, नक़द और सामान, चाहे मायके से हों या ससुराल से, हमेशा के लिए सिर्फ़ आपके हैं। इसी को स्त्रीधन कहते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिभा रानी केस (1985) में साफ़ कहा: स्त्रीधन पूरी तरह पत्नी का है। पति या ससुराल वाले उसे बस संभालने वाले हैं, मालिक नहीं।
  • स्त्रीधन लौटाने से मना करना अमानत में ख़यानत हो सकता है, IPC धारा 406 / भारतीय न्याय संहिता 2023 धारा 316।
  • आपका स्त्रीधन बेचना या ख़र्च कर देना घरेलू हिंसा क़ानून (PWDVA 2005) की धारा 3 में आर्थिक हिंसा है। मजिस्ट्रेट धारा 12 और 19(8) से वापस दिलाने का आदेश दे सकते हैं।
  • दहेज निषेध क़ानून 1961, धारा 6: जो भी दहेज किसी और के पास है, वह औरत को देना ही होगा। यह हक़ अलग होने या तलाक़ के बाद भी बना रहता है।

असली ज़िंदगी में

  • «हम गहने लॉकर में सेफ़ रख रहे हैं», किसी और के पास सेफ़ रखने से मालिक नहीं बदलता। आप कभी भी वापस मांग सकती हैं। यह सही नहीं है।
  • «लड़के वालों से मिले तोहफ़े उनके परिवार के हैं», जो भी आपको मिला, किसी भी तरफ़ से, वह स्त्रीधन है। यह सही नहीं है।
  • पति आपके गहने बिना पूछे गिरवी रखे, बेचे या इन्वेस्ट करे। यह घरेलू छूट नहीं, अमानत में ख़यानत है। यह सही नहीं है।
  • «घर छोड़ा तो गहने भी छोड़े», घर छोड़ने से स्त्रीधन नहीं छूटता। तलाक़ के बाद भी वापस मिल सकता है। यह सही नहीं है।
  • बैंक लॉकर सिर्फ़ पति या सास के नाम पर, जबकि उसमें आपका स्त्रीधन हो। यह सही नहीं है।
  • अपनी ही चीज़ों की लिस्ट रखने पर «लालची» कहना। लिस्ट बनाना आपका हक़ है, शर्म की बात नहीं। यह सही नहीं है।
  • ऐसे किसी पेपर पर साइन करवाना जिसमें लिखा हो कि तोहफ़े परिवार के हैं। यह सही नहीं है।

सँभाल कर रखें

  • हर चीज़ की सिंपल लिस्ट बनाएं, क्या है, कितना वज़न, किसने दिया, तारीख़ और फ़ोटो के साथ।
  • लिस्ट फ़ोन में रखें और अपने ईमेल पर बैकअप करें; एक कॉपी किसी भरोसे वाले को दें।
  • ख़रीदारी की रसीदें और शादी के फ़ोटो-वीडियो संभालें, यह सबूत हैं कि चीज़ें आपको मिली थीं।
  • लॉकर अपने या जॉइंट नाम पर लें। चीज़ें किसी और के पास हों तो WhatsApp पर रसीद मांग लें।
  • वापस देने से मना हो तो पहले लिखित मांग करें, शिकायत से पहले रिकॉर्ड बन जाता है।

एक कदम आज

आज अपने गहनों की लिस्ट बनाएँ, फोटो लें, तारीख़ डालें।

कहाँ जाएँ

ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), ज़िला कोर्ट के अंदर · वन स्टॉप सेंटर · प्रोटेक्शन ऑफ़िसर

किससे मिलें: DLSA फ़्रंट ऑफ़िस; प्रोटेक्शन ऑफ़िसर

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यह भी जानिए

यह जानकारी है, सलाह नहीं कानूनी विशेषज्ञ द्वारा जाँचा गया जाँचा गया: 13 अगस्त 2026